श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  10.1.48 
मृत्युर्बुद्धिमतापोह्यो यावद्बुद्धिबलोदयम् ।
यद्यसौ न निवर्तेत नापराधोऽस्ति देहिन: ॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
जब तक बुद्धि और शारीरिक शक्ति दोनों बनी रहे, तब तक बुद्धिमान व्यक्ति को मौत से बचने के उपाय करने चाहिए। यह हर मनुष्य का कर्तव्य है। लेकिन अगर कोशिशों के बाद भी मृत्यु को टाला नहीं जा सकता, तो मृत्यु को स्वीकार करने वाला व्यक्ति अपराधी नहीं होता है।
 
जब तक बुद्धि और शारीरिक शक्ति दोनों बनी रहे, तब तक बुद्धिमान व्यक्ति को मौत से बचने के उपाय करने चाहिए। यह हर मनुष्य का कर्तव्य है। लेकिन अगर कोशिशों के बाद भी मृत्यु को टाला नहीं जा सकता, तो मृत्यु को स्वीकार करने वाला व्यक्ति अपराधी नहीं होता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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