श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  10.1.45 
एषा तवानुजा बाला कृपणा पुत्रिकोपमा ।
हन्तुं नार्हसि कल्याणीमिमां त्वं दीनवत्सल: ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारी नन्ही बहन देवकी बेचारी तुम्हारी बेटी के समान है और वो प्यार-दुलार और देखभाल की हकदार है। तुम दयालु हो, इसलिए तुम्हें उसका वध नहीं करना चाहिए। निस्संदेह, वो तुम्हारे प्यार के लायक है।
 
तुम्हारी नन्ही बहन देवकी बेचारी तुम्हारी बेटी के समान है और वो प्यार-दुलार और देखभाल की हकदार है। तुम दयालु हो, इसलिए तुम्हें उसका वध नहीं करना चाहिए। निस्संदेह, वो तुम्हारे प्यार के लायक है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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