त्याग दुर्जन-संसर्गम्
भज साधु-समागमम्
करु पुण्यम् अहो रात्रम्
स्मर नित्यम् अनित्यताम्
व्यक्तियों को शैतानों, राक्षसों और भगवान में आस्था न रखने वालों के संग को छोड़ देना चाहिए और हमेशा भगवद्भक्तों और संतों के साथ जुड़ना चाहिए। व्यक्ति को हमेशा अपने कर्मों में धर्म का पालन करना चाहिए क्योंकि यह जीवन अस्थायी है और अस्थायी सुख और दुख से जुड़ना नहीं चाहिए। कृष्ण चेतना आन्दोलन मानव समाज को कृष्ण चेतना प्राप्त करने और इस प्रकार जीवन की समस्याओं का हमेशा के लिए समाधान करने का सिद्धांत सिखा रहा है (त्यक्त्वा देहं पुनर जन्म नैति माम एति सोऽर्जुन)।
