श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  10.1.36 
तं जुगुप्सितकर्माणं नृशंसं निरपत्रपम् ।
वसुदेवो महाभाग उवाच परिसान्‍त्वयन् ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
कंस अत्यंत क्रूर और ईर्ष्यालु था, वह अपनी बहन को मारने के लिए भी निर्लज्जतापूर्वक तैयार था। इसलिए उसे शांत करने के लिए कृष्ण के पिता होने वाले महात्मा वसुदेव ने उससे निम्नलिखित शब्द कहे।
 
कंस अत्यंत क्रूर और ईर्ष्यालु था, वह अपनी बहन को मारने के लिए भी निर्लज्जतापूर्वक तैयार था। इसलिए उसे शांत करने के लिए कृष्ण के पिता होने वाले महात्मा वसुदेव ने उससे निम्नलिखित शब्द कहे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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