श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  10.1.35 
इत्युक्त: स खल: पापो भोजानां कुलपांसन: ।
भगिनीं हन्तुमारब्धं खड्‍गपाणि: कचेऽग्रहीत् ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
कंस भोजवंश का घृणित व्यक्ति था क्योंकि वह ईर्ष्यालु और पापी था। इसलिए जब उसने यह आकाशवाणी सुनी तो उसने अपने बाएँ हाथ से अपनी बहन के बाल पकड़ लिए और अपने दाहिने हाथ से तलवार निकालकर उसके सिर को धड़ से अलग करने के लिए तैयार हो गया।
 
कंस भोजवंश का घृणित व्यक्ति था क्योंकि वह ईर्ष्यालु और पापी था। इसलिए जब उसने यह आकाशवाणी सुनी तो उसने अपने बाएँ हाथ से अपनी बहन के बाल पकड़ लिए और अपने दाहिने हाथ से तलवार निकालकर उसके सिर को धड़ से अलग करने के लिए तैयार हो गया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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