श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.1.34 
पथि प्रग्रहिणं कंसमाभाष्याहाशरीरवाक् ।
अस्यास्त्वामष्टमो गर्भो हन्ता यां वहसेऽबुध ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
जब कंस घोड़ों की लगाम सम्भालकर रथ को रास्ते पर चला रहा था, तब एक अशरीरी आवाज़ ने उसे सम्बोधित किया, "अरे मूर्ख दुष्ट! जिस स्त्री को तू ले जा रहा है उसकी आठवीं सन्तान तुझे मौत के घाट उतारेगी।"
 
जब कंस घोड़ों की लगाम सम्भालकर रथ को रास्ते पर चला रहा था, तब एक अशरीरी आवाज़ ने उसे सम्बोधित किया, "अरे मूर्ख दुष्ट! जिस स्त्री को तू ले जा रहा है उसकी आठवीं सन्तान तुझे मौत के घाट उतारेगी।"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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