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श्लोक 10.1.30  |
उग्रसेनसुत: कंस: स्वसु: प्रियचिकीर्षया ।
रश्मीन् हयानां जग्राह रौक्मै रथशतैर्वृत: ॥ ३० ॥ |
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| अनुवाद |
| राजा उग्रसेन के बेटे कंस अपनी बहन देवकी को उसकी शादी के मौके पर खुश करने के लिए घोड़ों की लगाम अपने हाथों में ले ली और खुद रथ चालक बन गया। वो सैकड़ों सुनहरे रथों से घिरा हुआ था। |
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| राजा उग्रसेन के बेटे कंस अपनी बहन देवकी को उसकी शादी के मौके पर खुश करने के लिए घोड़ों की लगाम अपने हाथों में ले ली और खुद रथ चालक बन गया। वो सैकड़ों सुनहरे रथों से घिरा हुआ था। |
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