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श्लोक 10.1.18  |
गौर्भूत्वाश्रुमुखी खिन्ना क्रन्दन्ती करुणं विभो: ।
उपस्थितान्तिके तस्मै व्यसनं समवोचत ॥ १८ ॥ |
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| अनुवाद |
| माता पृथ्वी गाय का रूप धरकर अत्यंत दुखियारी और अपनी आँखों में आँसू लिए भगवान ब्रह्मा के सामने प्रकट हुईं और उन्हें अपनी विपदा के बारे में बताया। |
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| माता पृथ्वी गाय का रूप धरकर अत्यंत दुखियारी और अपनी आँखों में आँसू लिए भगवान ब्रह्मा के सामने प्रकट हुईं और उन्हें अपनी विपदा के बारे में बताया। |
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