श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  10.1.17 
भूमिर्द‍ृप्तनृपव्याजदैत्यानीकशतायुतै: ।
आक्रान्ता भूरिभारेण ब्रह्माणं शरणं ययौ ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
एक बार माता पृथ्वी ने जब अपने ऊपर विराजित राजाओं के वेश में रहने वाले गर्वित असुरों की सेना के बढ़ते बोझ के कारण संकट का अनुभव किया तो वह इससे मुक्ति पाने हेतु भगवान ब्रह्मा की शरण में पहुँची।
 
एक बार माता पृथ्वी ने जब अपने ऊपर विराजित राजाओं के वेश में रहने वाले गर्वित असुरों की सेना के बढ़ते बोझ के कारण संकट का अनुभव किया तो वह इससे मुक्ति पाने हेतु भगवान ब्रह्मा की शरण में पहुँची।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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