देहं मानुषमाश्रित्य कति वर्षाणि वृष्णिभि: ।
यदुपुर्यां सहावात्सीत् पत्न्य: कत्यभवन् प्रभो: ॥ ११ ॥
अनुवाद
भगवान कृष्ण का शरीर भौतिक नहीं है, फिर भी वे इंसान के रूप में दिखाई देते हैं। उन्होंने वृष्णि वंश के साथ कितने साल बिताए? उनकी कितनी पत्नियां थीं? उन्होंने द्वारका में कितने साल बिताए?
Lord Krishna's body is not physical, yet He appears as a human. How many years did He live with the descendants of Vrishni? How many wives did He have? How many years did He live in Dwaraka?
तात्पर्य
कई स्थानों पर परमेश्वर को सच्चिदानंदविग्रह के रूप में वर्णित किया गया है, जिसका एक आध्यात्मिक, आनंदमय शरीर है। उनकी शारीरिक विशेषता नरालृति है, यानी बिल्कुल एक मनुष्य के समान। यहाँ भी वही विचार मानुषम आश्रित्य शब्दों में दोहराया गया है, जो यह संकेत देते हैं कि वो एक मनुष्य के शरीर को ही स्वीकार करते हैं। हर जगह यह पुष्टि की गयी है कि कृष्ण कभी भी निराकार या शरीरहीन नहीं हैं। उनका अपना रूप है, बिल्कुल एक मनुष्य जैसा। इसमे कोई संदेह नहीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥