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श्लोक 1.8.9  |
उत्तरोवाच
पाहि पाहि महायोगिन् देवदेव जगत्पते ।
नान्यं त्वदभयं पश्ये यत्र मृत्यु: परस्परम् ॥ ९ ॥ |
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| अनुवाद |
| उत्तरा बोलीं: हे देवाधिदेव! हे ब्रह्मांड के स्वामी! आप योगियों में श्रेष्ठ हैं। इस द्वैत से भरे संसार में आप ही मेरी रक्षा कर सकते हैं, कृपया मेरी रक्षा करें। |
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| उत्तरा बोलीं: हे देवाधिदेव! हे ब्रह्मांड के स्वामी! आप योगियों में श्रेष्ठ हैं। इस द्वैत से भरे संसार में आप ही मेरी रक्षा कर सकते हैं, कृपया मेरी रक्षा करें। |
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