श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.8.9 
उत्तरोवाच
पाहि पाहि महायोगिन् देवदेव जगत्पते ।
नान्यं त्वदभयं पश्ये यत्र मृत्यु: परस्परम् ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
उत्तरा बोलीं: हे देवाधिदेव! हे ब्रह्मांड के स्वामी! आप योगियों में श्रेष्ठ हैं। इस द्वैत से भरे संसार में आप ही मेरी रक्षा कर सकते हैं, कृपया मेरी रक्षा करें।
 
उत्तरा बोलीं: हे देवाधिदेव! हे ब्रह्मांड के स्वामी! आप योगियों में श्रेष्ठ हैं। इस द्वैत से भरे संसार में आप ही मेरी रक्षा कर सकते हैं, कृपया मेरी रक्षा करें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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