श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.8.45 
तां बाढमित्युपामन्‍त्र्य प्रविश्य गजसाह्वयम् ।
स्त्रियश्च स्वपुरं यास्यन् प्रेम्णा राज्ञा निवारित: ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
इस तरह से श्रीमती कुन्तीदेवी की प्रार्थना स्वीकार करने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने हस्तिनापुर के राजमहल में प्रवेश करके अन्य स्त्रियों को अपने प्रस्थान के बारे में जानकारी दी। लेकिन जब वे जाने की तैयारी करने लगे तो राजा युधिष्ठिर ने उन्हें रोक लिया और बड़े प्यार से उनसे विनती की।
 
इस तरह से श्रीमती कुन्तीदेवी की प्रार्थना स्वीकार करने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने हस्तिनापुर के राजमहल में प्रवेश करके अन्य स्त्रियों को अपने प्रस्थान के बारे में जानकारी दी। लेकिन जब वे जाने की तैयारी करने लगे तो राजा युधिष्ठिर ने उन्हें रोक लिया और बड़े प्यार से उनसे विनती की।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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