श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.8.39 
नेयं शोभिष्यते तत्र यथेदानीं गदाधर ।
त्वत्पदैरङ्किता भाति स्वलक्षणविलक्षितै: ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
हे गदाधर (कृष्ण), इस समय हमारे राज्य में आपके चरणों के निशान हैं, और इसलिए यह सुंदर लगता है। लेकिन जब आप चले जाओगे, तो यह ऐसा नहीं रहेगा।
 
हे गदाधर (कृष्ण), इस समय हमारे राज्य में आपके चरणों के निशान हैं, और इसलिए यह सुंदर लगता है। लेकिन जब आप चले जाओगे, तो यह ऐसा नहीं रहेगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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