श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.8.29 
न वेद कश्चिद्भगवंश्चिकीर्षितं
तवेहमानस्य नृणां विडम्बनम् ।
न यस्य कश्चिद्दयितोऽस्ति कर्हिचिद्
द्वेष्यश्च यस्मिन् विषमा मतिर्नृणाम् ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान, आपकी दिव्य लीलाएँ ऐसी हैं कि कोई उन्हें समझ नहीं सकता क्योंकि वे मानवीय प्रतीत होती हैं और इसीलिए भ्रामक हैं। आपका कोई कृपा-पात्र नहीं है और न ही कोई अप्रिय है। यह सिर्फ़ लोगों की कल्पना है कि आप पक्षपात करते हैं।
 
हे भगवान, आपकी दिव्य लीलाएँ ऐसी हैं कि कोई उन्हें समझ नहीं सकता क्योंकि वे मानवीय प्रतीत होती हैं और इसीलिए भ्रामक हैं। आपका कोई कृपा-पात्र नहीं है और न ही कोई अप्रिय है। यह सिर्फ़ लोगों की कल्पना है कि आप पक्षपात करते हैं।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas