श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.8.28 
मन्ये त्वां कालमीशानमनादिनिधनं विभुम् ।
समं चरन्तं सर्वत्र भूतानां यन्मिथ: कलि: ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, मेरा मानना है कि आप सनातन समय हैं, परम नियंत्रक हैं, जिसका कोई आरंभ और अंत नहीं है, जो सर्वव्यापी हैं। आप अपनी दया सभी पर समान रूप से बरसाते हैं। जीवों में जो पारस्परिक कलह है, वह सामाजिक मतभेदों के कारण है।
 
हे प्रभु, मेरा मानना है कि आप सनातन समय हैं, परम नियंत्रक हैं, जिसका कोई आरंभ और अंत नहीं है, जो सर्वव्यापी हैं। आप अपनी दया सभी पर समान रूप से बरसाते हैं। जीवों में जो पारस्परिक कलह है, वह सामाजिक मतभेदों के कारण है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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