श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.8.18 
कुन्त्युवाच
नमस्ये पुरुषं त्वाद्यमीश्वरं प्रकृते: परम् ।
अलक्ष्यं सर्वभूतानामन्तर्बहिरवस्थितम् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
श्रीमती कुन्ती ने कहा: हे कृष्ण, मैं तुम्हें नमन करती हूँ, क्योंकि तुम ही आदि पुरुष हो और इस भौतिक दुनिया के गुणों से अप्रभावित रहते हो। तुम समस्त वस्तुओं के अंदर और बाहर उपस्थित रहते हो, फिर भी सबके लिए अदृश्य हो ।
 
श्रीमती कुन्ती ने कहा: हे कृष्ण, मैं तुम्हें नमन करती हूँ, क्योंकि तुम ही आदि पुरुष हो और इस भौतिक दुनिया के गुणों से अप्रभावित रहते हो। तुम समस्त वस्तुओं के अंदर और बाहर उपस्थित रहते हो, फिर भी सबके लिए अदृश्य हो ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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