श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.8.16 
मा मंस्था ह्येतदाश्चर्यं सर्वाश्चर्यमयेऽच्युते ।
य इदं मायया देव्या सृजत्यवति हन्त्यज: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणों, गुह्य तथा अच्युत भगवान् की लीलाओं में इसे विशेष रूप से अद्भुत न समझो। अपनी अलौकिक शक्ति से वे समस्त भौतिक वस्तुओं का सृजन, पालन तथा विनाश करते हैं, यद्यपि वे स्वयं अजन्मे हैं।
 
हे ब्राह्मणों, गुह्य तथा अच्युत भगवान् की लीलाओं में इसे विशेष रूप से अद्भुत न समझो। अपनी अलौकिक शक्ति से वे समस्त भौतिक वस्तुओं का सृजन, पालन तथा विनाश करते हैं, यद्यपि वे स्वयं अजन्मे हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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