| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 1: सृष्टि » अध्याय 8: महारानी कुन्ती द्वारा प्रार्थना तथा परीक्षित की रक्षा » श्लोक 15 |
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| | | | श्लोक 1.8.15  | यद्यप्यस्त्रं ब्रह्मशिरस्त्वमोघं चाप्रतिक्रियम् ।
वैष्णवं तेज आसाद्य समशाम्यद् भृगूद्वह ॥ १५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे शौनक, भृगुवंश के गौरव, यद्यपि अश्वत्थामा द्वारा छोड़ा गया परम ब्रह्मास्त्र अमोघ था और उसका कोई निवारण नहीं हो सकता था, किंतु विष्णु [श्रीकृष्ण] के तेज से वह निष्क्रिय हो गया और नष्ट हो गया। | | | | हे शौनक, भृगुवंश के गौरव, यद्यपि अश्वत्थामा द्वारा छोड़ा गया परम ब्रह्मास्त्र अमोघ था और उसका कोई निवारण नहीं हो सकता था, किंतु विष्णु [श्रीकृष्ण] के तेज से वह निष्क्रिय हो गया और नष्ट हो गया। | | ✨ ai-generated | | |
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