श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 6: नारद तथा व्यासदेव का संवाद  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.6.35 
यमादिभिर्योगपथै: कामलोभहतो मुहु: ।
मुकुन्दसेवया यद्वत्तथात्माद्धा न शाम्यति ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
यह सच है कि योगाभ्यास द्वारा इंद्रियों को नियंत्रण में करके काम-वासनाओं से मुक्ति मिल सकती है। लेकिन फिर भी आत्मा को संतुष्टि नहीं मिलती क्योंकि वो संतुष्टि तो भगवान की भक्ति करने से ही मिलती है।
 
यह सच है कि योगाभ्यास द्वारा इंद्रियों को नियंत्रण में करके काम-वासनाओं से मुक्ति मिल सकती है। लेकिन फिर भी आत्मा को संतुष्टि नहीं मिलती क्योंकि वो संतुष्टि तो भगवान की भक्ति करने से ही मिलती है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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