श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 6: नारद तथा व्यासदेव का संवाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.6.20 
एवं यतन्तं विजने मामाहागोचरो गिराम् ।
गम्भीरश्लक्ष्णया वाचा शुच: प्रशमयन्निव ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
उस एकांत स्थान में मेरे प्रयासों को देखकर लौकिक वर्णन से परे भगवान् ने मेरे दुःख को हल्का करने के लिए गंभीर और सुखद वाणी में मुझसे कहा।
 
उस एकांत स्थान में मेरे प्रयासों को देखकर लौकिक वर्णन से परे भगवान् ने मेरे दुःख को हल्का करने के लिए गंभीर और सुखद वाणी में मुझसे कहा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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