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श्लोक 1.4.9  |
अभिमन्युसुतं सूत प्राहुर्भागवतोत्तमम् ।
तस्य जन्म महाश्चर्यं कर्माणि च गृणीहि न: ॥ ९ ॥ |
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| अनुवाद |
| ऐसा कहा जाता है कि महाराज परीक्षित परम भक्त थे और उनका जन्म व कर्म बहुत ही विलक्षण थे। कृपया उनके बारे में हमे बताएं। |
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| ऐसा कहा जाता है कि महाराज परीक्षित परम भक्त थे और उनका जन्म व कर्म बहुत ही विलक्षण थे। कृपया उनके बारे में हमे बताएं। |
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