श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 4: श्री नारद का प्राकट्य  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.4.9 
अभिमन्युसुतं सूत प्राहुर्भागवतोत्तमम् ।
तस्य जन्म महाश्चर्यं कर्माणि च गृणीहि न: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहा जाता है कि महाराज परीक्षित परम भक्त थे और उनका जन्म व कर्म बहुत ही विलक्षण थे। कृपया उनके बारे में हमे बताएं।
 
ऐसा कहा जाता है कि महाराज परीक्षित परम भक्त थे और उनका जन्म व कर्म बहुत ही विलक्षण थे। कृपया उनके बारे में हमे बताएं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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