एवं प्रवृत्तस्य सदा भूतानां श्रेयसि द्विजा: ।
सर्वात्मकेनापि यदा नातुष्यद्धृदयं तत: ॥ २६ ॥
अनुवाद
हे द्विज ब्राह्मणो,यद्यपि वे समस्त लोगों के समग्र कल्याण के लिए कार्यरत रहे, फिर भी उनका मन संतुष्ट नहीं हुआ।
O twice-born Brahmins, although he remained engaged in the overall welfare of all people, still his mind was not satisfied.
तात्पर्य
श्री व्यासदेव अपने आप से संतुष्ट नहीं थे, हालाँकि उन्होंने आम जनता के सर्वांगीण कल्याण के लिए वैदिक मूल्य के साहित्य तैयार किए थे। यह आशा की जाती थी कि वह ऐसी सभी गतिविधियों से संतुष्ट होंगे, लेकिन अंततः वह संतुष्ट नहीं हुए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥