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श्लोक 1.4.23  |
त एत ऋषयो वेदं स्वं स्वं व्यस्यन्ननेकधा ।
शिष्यै: प्रशिष्यैस्तच्छिष्यैर्वेदास्ते शाखिनोऽभवन् ॥ २३ ॥ |
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| अनुवाद |
| ये सभी विद्वान आचार्य अपनी-अपनी बारी में उन्हें सौंपे गए वेद-विद्या को अपने अनेक शिष्यों, उनके प्रशिष्यों तथा उनके भी शिष्यों को बताते गये और इस प्रकार वेदों के मानने वालों की अपनी-अपनी शाखाएँ बनती गईं। |
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| ये सभी विद्वान आचार्य अपनी-अपनी बारी में उन्हें सौंपे गए वेद-विद्या को अपने अनेक शिष्यों, उनके प्रशिष्यों तथा उनके भी शिष्यों को बताते गये और इस प्रकार वेदों के मानने वालों की अपनी-अपनी शाखाएँ बनती गईं। |
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