श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 4: श्री नारद का प्राकट्य  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.4.14 
सूत उवाच
द्वापरे समनुप्राप्ते तृतीये युगपर्यये ।
जात: पराशराद्योगी वासव्यां कलया हरे: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
सूत गोस्वामी उवाच: जब द्वापर युग और त्रेता युग का अतिव्यापन हो रहा था, तो उस समय वसु की पुत्री सत्यवती के गर्भ से महर्षि पराशर के द्वारा महान ऋषि व्यासदेव का जन्म हुआ।
 
सूत गोस्वामी उवाच: जब द्वापर युग और त्रेता युग का अतिव्यापन हो रहा था, तो उस समय वसु की पुत्री सत्यवती के गर्भ से महर्षि पराशर के द्वारा महान ऋषि व्यासदेव का जन्म हुआ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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