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श्लोक 1.4.14  |
सूत उवाच
द्वापरे समनुप्राप्ते तृतीये युगपर्यये ।
जात: पराशराद्योगी वासव्यां कलया हरे: ॥ १४ ॥ |
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| अनुवाद |
| सूत गोस्वामी उवाच: जब द्वापर युग और त्रेता युग का अतिव्यापन हो रहा था, तो उस समय वसु की पुत्री सत्यवती के गर्भ से महर्षि पराशर के द्वारा महान ऋषि व्यासदेव का जन्म हुआ। |
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| सूत गोस्वामी उवाच: जब द्वापर युग और त्रेता युग का अतिव्यापन हो रहा था, तो उस समय वसु की पुत्री सत्यवती के गर्भ से महर्षि पराशर के द्वारा महान ऋषि व्यासदेव का जन्म हुआ। |
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