श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 4: श्री नारद का प्राकट्य  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.4.13 
तत्सर्वं न: समाचक्ष्व पृष्टो यदिह किञ्चन ।
मन्ये त्वां विषये वाचां स्‍नातमन्यत्र छान्दसात् ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
हम यह जानते हैं कि आप वेदों के कुछ हिस्सों को छोड़कर शेष सभी विषयों के अर्थ में कुशल हैं, इसलिए आप उन समस्त प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दे सकते हैं जो हमने अभी आपसे पूछे हैं।
 
हम यह जानते हैं कि आप वेदों के कुछ हिस्सों को छोड़कर शेष सभी विषयों के अर्थ में कुशल हैं, इसलिए आप उन समस्त प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दे सकते हैं जो हमने अभी आपसे पूछे हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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