श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 4: श्री नारद का प्राकट्य  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.4.10 
स सम्राट् कस्य वा हेतो: पाण्डूनां मानवर्धन: ।
प्रायोपविष्टो गङ्गायामनाद‍ृत्याधिराट्‌श्रियम् ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
वे एक महान् सम्राट थे और उनके पास उपार्जित राज्य के सारे ऐश्वर्य थे। वे इतने वरेण्य थे कि उनसे पाण्डु वंश की प्रतिष्ठा बढ़ रही थी। तो फिर उन्होंने सब कुछ त्याग कर गंगा नदी के तट पर बैठकर आमरण उपवास करना क्यों शुरू कर दिया?
 
वे एक महान् सम्राट थे और उनके पास उपार्जित राज्य के सारे ऐश्वर्य थे। वे इतने वरेण्य थे कि उनसे पाण्डु वंश की प्रतिष्ठा बढ़ रही थी। तो फिर उन्होंने सब कुछ त्याग कर गंगा नदी के तट पर बैठकर आमरण उपवास करना क्यों शुरू कर दिया?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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