असंख्य भौतिक ब्रह्मांड हैं, और प्रत्येक ब्रह्मांड में असंख्य ग्रह हैं जो अलग-अलग प्रकार की प्रकृति में रहने वाले जीवों द्वारा बसे हुए हैं। भगवान (विष्णु) प्रत्येक ब्रह्मांड और प्रत्येक प्रकार के जीवित समाज में खुद को अवतारित करते हैं। वे प्रत्येक ब्रह्मांड में अपने अलौकिक लीलाओं का प्रदर्शन करते हैं ताकि भगवान के पास वापस जाने की इच्छा पैदा हो। भगवान अपने मूल अलौकिक स्थिति को नहीं बदलते हैं, लेकिन वे विशेष समय, परिस्थितियों और समाज के अनुसार अलग-अलग रूप से प्रकट होते हैं।
कभी-कभी वे खुद को अवतारित करते हैं या उनके लिए कार्य करने के लिए एक उपयुक्त जीव को अधिकार देते हैं, लेकिन दोनों ही मामलों में उद्देश्य एक ही है: भगवान चाहते हैं कि दुखी जीव भगवान के पास वापस घर जाएँ। जिस खुशी के लिए जीव तरस रहे हैं, वह असंख्य ब्रह्मांडों और भौतिक ग्रहों के किसी भी कोने में नहीं पाई जाती है। वह शाश्वत खुशी जो जीव चाहता है वह ईश्वर के राज्य में प्राप्त की जा सकती है, लेकिन भौतिक प्रकृति के प्रभाव में भूलने वाले जीवों को भगवान के राज्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसलिए, भगवान भगवान के राज्य के संदेश का प्रचार करने के लिए आते हैं, या तो व्यक्तिगत रूप से अवतार के रूप में या ईश्वर के अच्छे पुत्र के रूप में उनके प्रामाणिक प्रतिनिधि के माध्यम से। इस तरह के अवतार या ईश्वर के पुत्र केवल मानव समाज के भीतर ही भगवान के पास वापस जाने का प्रचार नहीं कर रहे हैं। देवताओं और मनुष्यों के अलावा अन्य सभी प्रकार के समाजों में उनका काम भी चल रहा है।
