श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 19: शुकदेव गोस्वामी का प्रकट होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.19.37 
अत: पृच्छामि संसिद्धिं योगिनां परमं गुरुम् ।
पुरुषस्येह यत्कार्यं म्रियमाणस्य सर्वथा ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
आप महान संतों और भक्तों के गुरु हैं। इसलिए मैं आपसे अनुनय करता हूँ कि आप सभी मनुष्यों के लिए और विशेष रूप से मृत्यु की मुँह में जानेवाले के लिए सिद्धि का रास्ता बताएँ।
 
आप महान संतों और भक्तों के गुरु हैं। इसलिए मैं आपसे अनुनय करता हूँ कि आप सभी मनुष्यों के लिए और विशेष रूप से मृत्यु की मुँह में जानेवाले के लिए सिद्धि का रास्ता बताएँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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