श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 19: शुकदेव गोस्वामी का प्रकट होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.19.36 
अन्यथा तेऽव्यक्तगतेर्दर्शनं न: कथं नृणाम् ।
नितरां म्रियमाणानां संसिद्धस्य वनीयस: ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
अन्यथा (भगवान श्री कृष्ण की प्रेरणा के बगैर) यह कैसे संभव हो पाया कि आप अपने आप यहाँ प्रकट हुए, जबकि आप साधारण मनुष्यों से छुपकर विचरण करते हैं और हम जैसे मौत के करीब पहुँच चुके लोगों को दिखाई नहीं देते?
 
अन्यथा (भगवान श्री कृष्ण की प्रेरणा के बगैर) यह कैसे संभव हो पाया कि आप अपने आप यहाँ प्रकट हुए, जबकि आप साधारण मनुष्यों से छुपकर विचरण करते हैं और हम जैसे मौत के करीब पहुँच चुके लोगों को दिखाई नहीं देते?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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