समागता: सर्वत एव सर्वे
वेदा यथा मूर्तिधरास्त्रिपृष्ठे ।
नेहाथ नामुत्र च कश्चनार्थ
ऋते परानुग्रहमात्मशीलम् ॥ २३ ॥
अनुवाद
राजा ने कहा: हे महर्षियों, आप सभी सृष्टि के कोने-कोने से आकर यहाँ पर कृपापूर्वक एकत्र हुए हैं। आप सभी परम ज्ञान के अवतार हैं, जो तीनों लोकों से ऊपर के लोक (सत्यलोक) में निवास करते हैं। फलस्वरूप आपकी स्वाभाविक प्रवृत्ति दूसरों का कल्याण करने की है और इसके अतिरिक्त इस जीवन या अगले जीवन में आपकी कोई अन्य रुचि नहीं है।
The king said: O great sages, you have kindly gathered here from every corner of the universe. You are all embodiments of supreme knowledge, who reside in the world above the three worlds (Satyalok). As a result, your natural tendency is to do good to others and apart from this you have no other interest in this life or the next.
तात्पर्य
संपत्ति, बल, यश, सौंदर्य, ज्ञान और वैराग्य इन छह ऐश्वर्यों का मूल रूप से परम भगवान की विभिन्न विशेषताओं से ही संबंध है। जीव जो कि परम पुरुष की अभिन्न आंशिक-इकाइयां हैं, ये सभी विशेषताएं पूर्ण क्षमता के सत्यासी प्रतिशत तक ही रखते हैं। भौतिक जगत में ये विशेषताएं (भगवान की विशेषताओं के सत्तासी प्रतिशत तक) भौतिक ऊर्जा से ढकी होती हैं, जैसे सूर्य बादल से ढका होता है। सूर्य की ढकी हुई क्षमता मूल तेज की तुलना में बहुत कम होती है, और इसी प्रकार जीवों का ऐसी विशेषताओं वाला मूल रंग लगभग विलुप्त हो जाता है। तीन ग्रह-तंत्र हैं, निचले लोक, मध्यवर्ती लोक और ऊपरी लोक। पृथ्वी के मनुष्य मध्यवर्ती लोक की शुरुआत में स्थित होते हैं, परंतु ब्रह्मा जैसे जीव और उनके समकालीन ऊपरी लोकों में निवास करते हैं, जिनमें से सबसे ऊपर सत्यलोक है। सत्यलोक में वास करने वाले वैदिक ज्ञान के पूर्ण ज्ञाता होते हैं और इस प्रकार भौतिक ऊर्जा के रहस्यमयी बादल साफ हो जाते हैं। इसलिए उन्हें वैदों का साक्षात रूप माना जाता है। सांसारिक और पारमार्थिक दोनों तरह के ज्ञान के पूर्ण जागरूक होने के कारण ऐसे लोगों की सांसारिक या तपस्वी दोनों ही जगतों में कोई रूचि नहीं होती। वे व्यवहारिक रूप से इच्छाहीन भक्त होते हैं। सांसारिक जगत में उन्हें प्राप्त करने के लिए कुछ नहीं होता, और तपस्वी जगत में वे स्वयं में संतुष्ट होते हैं। फिर वे सांसारिक जगत में क्यों आते हैं? वे गिरी हुई आत्माओं को मुक्त करने के लिए भगवान के आदेश से विभिन्न ग्रहों पर मसीहा के रूप में अवतरित होते हैं। वे पृथ्वी पर अन्य जलवायु परिस्थितियों में विभिन्न स्थितियों में अवतरित होते हैं और विश्व के लोगों का भला करते हैं। भौतिक ऊर्जा से मोहित भौतिक अस्तित्व में सड़ने वाली गीरी हुई आत्माओं को फिर से बचाने को छोड़कर इस जगत में उनका कोई कार्य नहीं होता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥