श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 18: ब्राह्मण बालक द्वारा महाराज परीक्षित को शाप  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.18.34 
ब्राह्मणै: क्षत्रबन्धुर्हि गृहपालो निरूपित: ।
स कथं तद्गृहे द्वा:स्थ: सभाण्डं भोक्तुमर्हति ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
राजा के वंशजों को द्वारपाल कुत्तों के रूप में नियुक्त किया गया है, और उन्हें द्वार पर ही रहना चाहिए। तो फिर वे किस आधार पर घर में घुसकर अपने स्वामी की थाली में खाना खाने का दावा करते हैं?
 
राजा के वंशजों को द्वारपाल कुत्तों के रूप में नियुक्त किया गया है, और उन्हें द्वार पर ही रहना चाहिए। तो फिर वे किस आधार पर घर में घुसकर अपने स्वामी की थाली में खाना खाने का दावा करते हैं?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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