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श्लोक 1.18.30  |
स तु ब्रह्मऋषेरंसे गतासुमुरगं रुषा ।
विनिर्गच्छन्धनुष्कोट्या निधाय पुरमागत: ॥ ३० ॥ |
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| अनुवाद |
| उस अपमान से उत्तेजित होकर राजा लौटते समय अपने धनुष से एक मृत सर्प को उठा लाए और क्रुद्ध होकर उन्होंने उसे मुनि के कंधे पर रख दिया। इसके बाद वे वापस राज महल लौट गए। |
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| उस अपमान से उत्तेजित होकर राजा लौटते समय अपने धनुष से एक मृत सर्प को उठा लाए और क्रुद्ध होकर उन्होंने उसे मुनि के कंधे पर रख दिया। इसके बाद वे वापस राज महल लौट गए। |
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