श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 18: ब्राह्मण बालक द्वारा महाराज परीक्षित को शाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.18.3 
उत्सृज्य सर्वत: सङ्गं विज्ञाताजितसंस्थिति: ।
वैयासकेर्जहौ शिष्यो गङ्गायां स्वं कलेवरम् ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
तदुपरांत सभी संगियों को त्यागकर राजा ने व्यास पुत्र (शुकदेव गोस्वामी) की शरण ग्रहण की और इस प्रकार वे भगवान की परम स्थिति को समझ सके।
 
तदुपरांत सभी संगियों को त्यागकर राजा ने व्यास पुत्र (शुकदेव गोस्वामी) की शरण ग्रहण की और इस प्रकार वे भगवान की परम स्थिति को समझ सके।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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