श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 17: कलि को दण्ड तथा पुरस्कार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.17.8 
न जातु कौरवेन्द्राणां दोर्दण्डपरिरम्भिते ।
भूतलेऽनुपतन्त्यस्मिन् विना ते प्राणिनां शुच: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
कुरुवंश के राजाओं के बाहुबल से सुरक्षित राज्य में आज पहली बार मैं तुम्हें आँखों में आँसू भरे शोक करते हुए देख रहा हूँ। आज तक पृथ्वी पर किसी ने राजा की उपेक्षा से कभी आँसू नहीं बहाए।
 
In the kingdom protected by the might of the kings of the Kuru dynasty, today for the first time I am seeing you mourning with tears in your eyes. Till date no one on earth has shed tears due to the neglect of a king.
तात्पर्य
हिंसा से मनुष्यों और पशुओं दोनों के प्राणों की रक्षा करना ही एक सरकार का प्रथम और सर्वोपरि दायित्व है। ऐसे सिद्धांत में सरकार भेदभाव नहीं कर सकती। कलियुग में राष्ट्र द्वारा संगठित पशु हत्या देखना एक पवित्र हृदय के लिए भयानक है। महाराज परीक्षित सांड की आँखों में आँसू देखकर विलाप कर रहे थे और अपने शुभ राज्य में यह अप्रत्याशित घटना देखकर हैरान रह गए। जहाँ तक प्राणों का सम्बन्ध है, मनुष्य और पशु समान रूप से संरक्षित थे। परमेश्वर के राज्य में यही मार्ग है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)