अहो! आज पुन: आपकी उपस्थिति से हम आपके संरक्षण में आ गए, यह हमारा सौभाग्य है, क्योंकि स्वर्ग के निवासियों के यहाँ भी आप कभी-कभार ही जाते हैं। अब आपके हँसते हुए चेहरे को देखना हमारे लिए संभव हो सका है, जो अपना प्यार दर्शाती दृष्टि से परिपूर्ण है। अब हम आपके दिव्य स्वरूप को देख सकते हैं, जो सभी सौभाग्य से परिपूर्ण है।
Ah! It is our good fortune that today again we have come under your protection through your presence, because you sometimes visit the heavenly dwellers also. It has now become possible for us to see your smiling face, which is full of tender glances. Now we can see your all-fortunate divine form.
तात्पर्य
अपने शाश्वत रूप में भगवान को केवल शुद्ध भक्त ही देख सकते हैं। ईश्वर कभी अवैयक्तिक नहीं होते हैं, लेकिन वह परमात्मा के सर्वोच्च निरपेक्ष व्यक्तित्व हैं, जिनसे भक्ति सेवा के माध्यम से मिलना संभव है। यह कार्य उच्च ग्रहों के निवासियों के लिए भी असंभव है। जब ब्रह्माजी और अन्य देवता भगवान विष्णु से परामर्श करना चाहते हैं, जो भगवान कृष्ण के पूर्ण स्वरूप हैं, तो उन्हें दूध के सागर के तट पर इंतजार करना पड़ता है जहाँ भगवान विष्णु श्वेत द्वीप (श्वेताद्वीप) पर लेटे हुए हैं। यह दूध का महासागर और श्वेताद्वीप ग्रह ब्रह्मांड के भीतर वैकुण्ठलोक की प्रतिकृति हैं। न तो ब्रह्माजी और न ही इंद्र जैसे देवता श्वेताद्वीप द्वीप में प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन वे दूध के सागर के किनारे खड़े होकर भगवान विष्णु, जिन्हें क्षीरदकशयी विष्णु के रूप में जाना जाता है, को अपना संदेश भेज सकते हैं। इसलिए, भगवान उन्हें बहुत कम ही दिखाई देते हैं, लेकिन द्वारका के निवासी, भौतिक संदूषण या अनुभवजन्य दार्शनिक अटकलों के बिना शुद्ध भक्त होने के कारण, भगवान की कृपा से उन्हें आमने-सामने देख सकते हैं। यही जीवित संस्थाओं की मूल स्थिति है और जीवन की हमारी स्वाभाविक और संवैधानिक स्थिति को पुनर्जीवित करके प्राप्त किया जा सकता है, जिसे केवल भक्ति सेवा द्वारा खोजा जा सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥