हे शौनक, फिर भगवान जी कुरुजांगल, पाञ्चाल, शूरसेन, यमुना के तट पर स्थित प्रदेश, ब्रह्मावर्त, कुरुक्षेत्र, मत्स्या, सारस्वता, मरु क्षेत्र और जल विहीन प्रदेश से होते हुए आगे बढ़े। इन प्रांतों को पार करने के बाद वे सौवीर और आभीर प्रांत पहुंचे, फिर इन सबके पश्चिम की ओर स्थित द्वारका पहुंचे।
O Saunak, then the Lord proceeded through Kurujangaal, Panchal, Shurasena, the coastal regions of Yamuna, Brahmavarta, Kurukshetra, Matsya, Saraswata, desert regions and areas lacking water. After crossing these provinces, they reached Sauvir and Abhir provinces and finally reached Dwarka situated towards the west of all these.
तात्पर्य
उन दिनों प्रभु द्वारा की गई यात्रा में प्रांतों के नाम भिन्न थे, लेकिन दिए गए निर्देश यह इंगित करने के लिए पर्याप्त हैं कि, उन्होंने दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, सौराष्ट्र और गुजरात की यात्रा की और अंत में अपने गृह प्रांत द्वारका पहुंचे। हम केवल उन दिनों के अनुरूप प्रांतों पर अब तक शोध करके कोई लाभ प्राप्त नहीं कर सकते हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्थान का मरुस्थल और मध्य प्रदेश जैसे जल की कमी वाले प्रांत पाँच हजार साल पहले भी मौजूद थे। मृदा विशेषज्ञों का यह सिद्धांत कि मरुस्थल हाल के वर्षों में विकसित हुआ है, भागवतम के कथनों द्वारा समर्थित नहीं है। हम विशेषज्ञ भूवैज्ञानिकों के लिए इस विषय को शोध के लिए छोड़ सकते हैं क्योंकि बदलते ब्रह्मांड में भूवैज्ञानिक विकास के विभिन्न चरण होते हैं। हम संतुष्ट हैं कि प्रभु अब कुरु प्रांतों से अपने प्रांत, द्वारका-धाम पहुंच चुके हैं। कुरुक्षेत्र वैदिक युग से लगातार अस्तित्व में है, और यह सरासर मूर्खता है जब व्याख्याकार कुरुक्षेत्र के अस्तित्व को नज़रअंदाज़ करते हैं या नकारते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥