श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 10: द्वारका के लिए भगवान् कृष्ण का प्रस्थान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.10.30 
एता: परं स्त्रीत्वमपास्तपेशलं
निरस्तशौचं बत साधु कुर्वते ।
यासां गृहात्पुष्करलोचन: पति-
र्न जात्वपैत्याहृतिभिर्हृदि स्पृशन् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
इन सभी स्त्रियों ने अपने व्यक्तित्व और शुद्धता के अभाव में भी, अपने जीवन को सौभाग्यशाली बना लिया। उनके पति कमलनयन भगवान ने उन्हें घर में कभी अकेला नहीं छोड़ा। वे उन्हें बहुमूल्य भेंट देकर उनके दिलों को हमेशा खुश करते रहे।
 
इन सभी स्त्रियों ने अपने व्यक्तित्व और शुद्धता के अभाव में भी, अपने जीवन को सौभाग्यशाली बना लिया। उनके पति कमलनयन भगवान ने उन्हें घर में कभी अकेला नहीं छोड़ा। वे उन्हें बहुमूल्य भेंट देकर उनके दिलों को हमेशा खुश करते रहे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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