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श्लोक 2.7.88  |
त्वत्तो ’द्य श्रवणाद् एषां
को ’प्य् अर्थो भाति मे हृदि
अहो भागवतानां हि
महिमा परमाद्भुतः |
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| अनुवाद |
| परन्तु अब आपके मुख से ये श्लोक सुनकर मेरे हृदय में नवीन अंतर्दृष्टि का प्रकाश हो रहा है। हे प्रभु के भक्तों की अद्भुत महिमा तो देखो! |
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| But now, hearing these verses from you, my heart is filled with new insight. O behold the wondrous glory of the Lord's devotees! |
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