निश्चित रूप से गोलोक केवल गायों का घर नहीं है, क्योंकि उन गायों की देखभाल करने वाले गोप और गोपियों को साध्यास्तां पालयन्ति हि ("साध्य उसकी रक्षा करते हैं") शब्दों से पहले ही इंगित किया जा चुका है। पृथ्वी पर मथुरा जिले में गोकुल की तरह, भले ही उसका नाम गायों के नाम पर रखा गया हो, लेकिन वह ग्वालों का भी निवास स्थान है, आध्यात्मिक दुनिया में गोलोक भी कृष्ण के साथ विभिन्न संबंधों में भक्तों से आबाद है।
कृष्ण से इन प्रार्थनाओं का पाठ करते हुए, इंद्र स्वीकार करता है कि उसने कृष्ण के निवास की शांति भंग करने का प्रयास किया था। बेशक, गोलोक शाश्वत और हमेशा पूर्ण आनंदमय है, और वहां जाने की अनुमति प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति सभी संकटों से मुक्त है। लेकिन इंद्र, गोलोक की महिमा से पूरी तरह अवगत नहीं होने के कारण, गलत तरीके से सोचता है कि उसने वहां अशांति पैदा की है। अपने सीमित दृष्टिकोण से अपने अपराधों का वर्णन करते हुए, वह कल्पना करता है कि पृथ्वी पर गोकुल पर हमला करके उसने सर्वोपरि आध्यात्मिक राज्य गोलोक में भी चिंता पैदा कर दी।
