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श्लोक 2.7.79  |
अधुनात्राभियुक्तानि
मुनीनां महतां शृणु
इमानि वचनान्य् आत्म-
चित्त-सन्तोषणानि हि |
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| अनुवाद |
| अब कृपया महान ऋषियों के कुछ प्रासंगिक कथन सुनें, जो आपके मन को पूरी तरह संतुष्ट कर देंगे। |
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| Now please listen to some relevant sayings of great sages, which will satisfy your mind completely. |
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