श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 7: जगद-आनन्द (विश्वों का आनंद)  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  2.7.55-56 
रसाल-ताल-बिल्वानि
बदरामलकानि च
नारिकेलानि पनस-
द्राक्षा-कदलकानि च

नागरङ्गानि पीलूनि
करीराण्य् अपराण्य् अपि
खर्जूर-दाडिमादीनि
पक्वानि रसवन्ति च
 
 
अनुवाद
उन्होंने रसाल, ताड़ के फल, बिल्व, बदर, आमलक, नारियल, कटहल, अंगूर और केले परोसे। उन्होंने संतरे, पीलू, करीरे और अन्य पके, स्वादिष्ट फल, जैसे खजूर और अनार, परोसे।
 
They served rasalas, palm fruits, bilva, badar, amalaka, coconuts, jackfruit, grapes, and bananas. They also served oranges, pilu, kareer, and other ripe, delicious fruits, such as dates and pomegranates.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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