| श्री बृहत् भागवतामृत » खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य » अध्याय 7: जगद-आनन्द (विश्वों का आनंद) » श्लोक 25 |
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| | | | श्लोक 2.7.25  | कदम्ब-गुञ्जा-तुलसी-शिखण्ड-
प्रवाल-मालावलि-चारु-वेशम्
कटी-तटी-राजित-चित्र-पुष्प-
काञ्ची-विलम्बाढ्य-नितम्ब-देशम् | | | | | | अनुवाद | | कदम्ब के पुष्पों, गुंजा, तुलसीदल और शिखा की मालाओं से उनका वस्त्र सुशोभित था। नाना प्रकार के रंग-बिरंगे पुष्प उनकी कमर को सुशोभित कर रहे थे और उनकी कमर पर मेखला इस प्रकार लटकी हुई थी कि वह उनके कूल्हों की शोभा बढ़ा रही थी। | | | | His clothing was adorned with garlands of kadamba flowers, gunja, tulsi leaves, and shikha. A variety of colorful flowers adorned his waist, and a girdle hung from his waist, accentuating his hips. | | ✨ ai-generated | | |
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