श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 7: जगद-आनन्द (विश्वों का आनंद)  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.7.23 
निःशेष-सल्-लक्षण-सुन्दराङ्गं
नीपावतंसं शिखि-पिच्छ-चूडम्
मुक्तावली-मण्डित-कम्बु-कण्ठं
कौशेय-पीताम्बर-युग्म-दीप्तम्
 
 
अनुवाद
उनके सुंदर शरीर पर सभी शुभ चिह्न अंकित थे। उनके कानों में कदम्ब के पुष्पों की मालाएँ और केशों में मोर पंख सुशोभित थे। उनके शंख-सदृश कंठ में मोतियों की माला थी। उनके ऊपर-नीचे पीले रेशमी वस्त्र चमक रहे थे।
 
His beautiful body bore all the auspicious marks. Garlands of kadamba flowers adorned his ears and peacock feathers adorned his hair. A string of pearls adorned his conch-like neck. Yellow silk robes shone above and below him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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