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श्लोक 2.7.22  |
स्वकीय-कैशोर-महा-विभूषणं
विचित्र-लावण्य-तरङ्ग-सागरम्
जगन्-मनो-नेत्र-मुदां विवर्धनं
मुहुर् मुहुर् नूतन-माधुरी-भृतम् |
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| अनुवाद |
| उनका मुख्य आभूषण उनका अद्वितीय यौवन था। वे सौंदर्य की अद्भुत लहरों से भरा सागर थे। नित नए-नए आकर्षणों से अलंकृत, वे सबके मन और नेत्रों के आनंद को द्विगुणित कर देते थे। |
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| His chief ornament was his unparalleled youth. He was an ocean of wondrous waves of beauty. Adorned with ever-new charms, he multiplied the delight of everyone's heart and eyes. |
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