श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  2.6.96 
अथ कोष्णैः सु-वासैस् तं
यामुनैर् निर्मलैर् जलैः
स-लीलं स्नापयाम् आसू
रत्न-कुम्भ-घटी-भृतैः
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने खेल-खेल में उन्हें गर्म, स्वच्छ, सुगंधित जल से स्नान कराया, जो रत्नजटित पात्रों और छोटे मिट्टी के बर्तनों में यमुना से लाया गया था।
 
After this, he playfully bathed them in warm, clean, fragrant water, which was brought from the Yamuna in jeweled vessels and small earthen pots.
तात्पर्य
कृष्ण को नहलाने के लिए ग्वालिनें सावधान रहती थीं कि पानी हल्का गर्म हो, लेकिन उबलता हुआ नहीं। वे सबसे ताजा और सुगंधित पानी का उपयोग करती थीं, जो उन्हें मिल सकता था, यानी यमुना नदी का पानी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)