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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 92
श्लोक
2.6.92
अभ्यज्योत्तम-तैलैस् ताः
कर्तुम् उद्वर्तनं शनैः
आरेभिरे स्व-हस्ताब्ज-
कोमल-स्पर्श-पाटवैः
अनुवाद
गोपियों ने कृष्ण पर उत्तम तेल लगाया और स्पर्श में निपुण अपने कोमल कमल जैसे हाथों से धीरे-धीरे अतिरिक्त तेल को हटाया।
The gopis applied the finest oil to Krishna and slowly removed the excess oil with their soft, lotus-like hands, expert in touch.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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