उन भगवान् श्रेष्ठ ने मेरा हाथ अपने बाएँ कमल-हस्त में लेकर मुझे एक चिर-परिचित आत्मीय मित्र की तरह ग्रहण किया। उन्होंने मुझसे अनेक प्रश्न पूछे। तत्पश्चात् उन्होंने समस्त व्रजवासियों का अभिवादन किया और हाथी की चाल से उत्तम गोप-ग्राम में प्रवेश किया।
That great Lord took my hand in his left lotus hand and welcomed me as a long-known, close friend. He asked me many questions. Then he greeted all the residents of Vraja and entered the excellent Gopa village with the gait of an elephant.
तात्पर्य
कृष्ण के अंतरंग मित्र उन्हें अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय होते हैं। गोप-कुमार का हाथ थामकर कृष्ण ने उनका स्वागत ऐसे प्रश्नों से किया जैसे "प्रिय मित्र, क्या तुम स्वस्थ और प्रसन्न हो?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥