श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  2.6.69 
खगास् तस्योपरिष्टाच् च
भ्रमन्तो व्योम्नि दुःखिताः
रुदन्त इव कुर्वन्ति
कोलाहलम् अनेकशः
 
 
अनुवाद
ऊपर से उड़ते हुए बड़ी संख्या में पक्षी भी शोर मचाकर अपनी पीड़ा बता रहे थे, जो लोगों के रोने जैसा लग रहा था।
 
A large number of birds flying overhead were also making noise to express their pain, which sounded like people crying.
तात्पर्य
आकाश में उड़ते पक्षी ठीक से नहीं समझ पाए कि नीचे क्या हो रहा था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सहानुभूतिपूर्वक प्रतिक्रिया दी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)