श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.6.58 
धरा-तल-श्री-भर-दान-हेतुना
भूमि-स्पृशोर् नृत्य-विलास-गामिनोः
सुजातयोः श्री-पद-पद्मयोर् जवाद्
उच्चालनोल्लास-भरैर् मनोहरः
 
 
अनुवाद
उनके कोमल, दिव्य चरणकमलों ने पृथ्वी की सतह को स्पर्श किया, केवल उसे परम ऐश्वर्य का वरदान देने के लिए। वे क्रीड़ापूर्वक नाचते हुए, बड़े-बड़े कदमों से शीघ्रतापूर्वक चलने की अपनी उत्कंठा से सबका मन मोह लेते थे।
 
His soft, divine feet touched the surface of the earth only to bestow supreme opulence upon it. He captivated everyone with his playful dancing and his swift, swift strides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)