श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 363
 
 
श्लोक  2.6.363 
इयं ते कथिता ब्रह्मन्
गोलोकस्य विलक्षणा
माहात्म्य-माधुरी-धारा-
प्रान्त-काष्ठा हि सर्वतः
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! इस प्रकार मैंने तुम्हें गोलोक की अद्वितीय, परम महानता और माधुर्य के विषय में बताया है, जो बाढ़ की नदी की तरह सर्वत्र प्रवाहित होती है।
 
O Brahmana, thus have I told you about the matchless, supreme greatness and sweetness of Goloka, which flows everywhere like a flooded river.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)